DMIT Test की आवश्यकता क्यों है ? Why Do DMIT Test ?
DMIT (Dermatoglyhics Multiple Intelligence Test) क्यों करवायें ?
DMIT IMPORTANCE BY DR. VIVEK BINDRA
ऐसा देखा गया है कि अभिभावक और बच्चो में उनके करियर को लेकर चिंता बनी रहती है | यह विषय तकनिकी नहीं किन्तु पेचीदा जरूर है क्योंकि करियर के सही चुनाव पर ही विद्यार्थी आगे बढ़ेगा | करियर का चुनाव एक ऐसा विषय बन गया है कि इस विषय को लेकर विद्यार्थी और अभिभावक आपस में विवाद करते भी देखे गए हैं | क्योंकि माता पिता अपनी समझ और अनुभव के आधार पर बच्चों का सही करियर का चुनाव करने में मदद करते हैं | किन्तु बच्चे स्वयं अपने पसंद का विषय लेना चाहते हैं अथवा अपनी पसंद के करियर का चुनाव करना चाहते हैं | किन्तु दुविधा तब होती है जब माता पिता के अनुसार करियर का चुनाव नहीं करने पर बच्चों और माता पिता के रिश्तों में खटास आ जाती है या इसके विपरीत बच्चा दुसरा विषय लेना चाहता था किन्तु माता पिता ने अपनी सूझबूझ और अनुभव के आधार पर बताया लेकिन विद्यार्थी उस विषय में सफलता दर्ज नहीं करवा सका | तब बच्चा यह भावना करता है कि काश मैंने अपनी पसंद का विषय लिया होता तो आज मैं सफल हो जाता और बच्चे इस तरह मन में यह बात बैठा लेते हैं कि माता पिता जो कहें वो नहीं करें, उसमे सफलता नहीं है | किन्तु यहाँ माता पिता और बच्चा दोनों अपने स्थान पर सही होते हैं |
इसी क्रम में आगे एक और फैक्ट हम देखें कि प्रतियोगिता के दौर में विद्यार्थी अपनी पूरी मेहनत से पढ़ने के बाद भी सफल न हों तो अवसाद का शिकार हो जाते हैं और भावनात्मक रूप से अपने आप को इतना कमजोर बना लेते हैं या यूँ कहा जाये कि असफलता विद्यार्थी के दिल और मानसिक स्तर पर इस प्रकार प्रहार करती है कि विद्यार्थी भावनात्मक रूप से एकदम टूट जाता है और आत्महत्या की ओर अग्रसर हो चलता है और अपनी इतनी खूबसूरत जिंदगी का अंत कर देता है |
भारत में यह देखने में आया है कि 1 वर्ष में 14000 विद्यार्थी पढ़ाई के तनाव के कारण आत्महत्या कर लेते हैं | अभी कुछ वर्ष पहले राजस्थान के कोटा जिले में एक सर्वे से यह आंकड़े सामने आये तथा Newspaper में प्रकाशित हुए कि हर आठवें दिन एक विद्यार्थी पढाई के तनाव को झेल नहीं पाता और आत्महत्या कर बैठता है | क्या यह आंकड़े रोंगटे खड़े कर देने वाले नहीं हैं ? क्या यह आंकड़े कम नहीं किये जाने चाहिए ? युवा पीढ़ी को उचित मार्गदर्शन नहीं दिया जाना चाहिए | क्या विद्यार्थियों को उनकी क्षमता के अनुसार या उनकी जन्मजात प्रतिभा के अनुसार विषय और करियर का चुनाव नहीं करवाया जाना चाहिए |



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